भारत में लगने वाले जी.एस.टी. का व्यवहारिक स्वरुप
जी.एस.टी. संवैधानिक संशोधन पर भारत के राष्ट्रपति महोदय के द्वारा इस पर हस्ताक्षर कर अपनी सहमती दे दी गई है और इसके साथ ही भारत सरकार ने इसे दिनांक 8 सितम्बर 2016 को अपने गजट अर्थात राजपत्र में प्रकाशित कर इसके कानून बनने की प्रक्रिया को पूरा कर दिया है और अब केंद्र एवं राज्य सरकार को जी.एस.टी. लागू करने की शक्तियाँ प्राप्त हो गई है .अब भारत में जी.एस.टी. लगाने की राह में कोई भी संवैधानिक बाधा शेष नहीं है . हमारे कानून निर्माताओं ने राज्यों की सरकारों को प्रेरित कर जिस आसानी से एवं जिस गति से जी.एस.टी. बिल का अनुमोदन करवाया है वह निसंदेह ही सराहनीय है और इस कानून को लागू करने के प्रति उनकी गंभीरता को दर्शाता है .
अब केंद्र एवं राज्यों के द्वारा जी.एस.टी. कानून बनाए जायेंगे तब ही जी.एस.टी. पूरे भारत में लागू हो पायेगा. यहाँ यह ध्यान रखें कि भारत में लगने वाला जी.एस.टी. कानून एक इस तरह का कर है जिसमे करयोग्य एक ही व्यवहार पर केंद्र एवं राज्य अलग –अलग कर वसूल करेंगे और जी.एस.टी. का एक भाग अर्थात सी.जी.एस.टी. केंद्र सरकार के अधीन होगा और दूसरा भाग अर्थात एस.जी.एस.टी. राज्य सरकार के अधीन होगा इसलिए केंद्र की संसद एवं देश की प्रत्येक विधान सभा को अपना –अपना अलग जी.एस.टी.कानून (जिसे सी.जी.एस.टी. एक्ट और एस.जी.एस.टी.एक्ट कहा जाएगा ) पारित करना होगा. राज्यों के वित्त मंत्रियों की सलाहकार समिति ने जी.एस.टी. के आदर्श कानून का एक प्रारूप जारी किया था और अब इसमें विभिन्न वर्गों से प्राप्त सुझावों के आधार पर इसे संशोधित कर के और की.एस.टी. कानून का मसौदा तैयार किया गया है और जहाँ तक उम्मीद है केंद्र एवं राज्य इस प्रारूप पर भी विभिन्न वर्गों से मिलने वाले सुझावों के बाद एक अंतिम प्रारूप तैयार करेंगे जिसक आधार पर ही केंद्र एवं राज्य अपने कानून बनायंगे संसद में एवं राज्यों की विधान सभाओं में बनायेंगे.
इसके अतिरिक्त दो राज्यों के बीच होने वाले वयापर के लिए एस.जी.एस.टी. एक्ट भी पारित करना होगा.
जी.एस.टी. अब भारत में लागू होने के बहुत ही करीब है और यह तो निश्चित ही है कि अब यह कर भारत में लगेगा ही और यदि यह समय 1 जुलाई 2017 किसी भी कारण से नहीं भी हो तो भी कुछ महीनो में या फिर इसके बाद वाले साल में तो जी.एस.टी. भारत में लगेगा ही लेकिन जी.एस.टी. के बारे में अभी भी कई भ्रांतियां आम उपभोक्ता एवं करदाताओं के मन में है जो कि हमें कई जगह सुनने को मिलता है जैसे अब कर एक ही जगह लगेगा, राज्यों में लगने वाला वेट तो अब समाप्त होगा ही इसके साथ ही सेंट्रल एक्साइज भी समाप्त हो जाएगा और राज्य अब कोई कर नहीं लगा पाएंगे इत्यादि – इत्यादि ये सभी भ्रांतियां है क्यों कि केंद्र और राज्य के मुख्य अप्रत्यक्ष कर जी.एस.टी. में समाहित तो हो जायेंगे लेकिन इनकी वसूली केंद्र और राज्य अभी भी अर्थात जी.एस.टी. में भी अलग –अलग ही करेंगे इसलिए जी.एस.टी. के बारे में करदाताओं के मन में जो भ्रांतियां है उनका निवारण इसलिए भी होना आवश्यक है कि अब आगे – पीछे अब भारत में जी.एस.टी. तो लगना ही है . इसके लिए जरुरी है कि जी.एस.टी. के बारे में एक परिचय सरल एवं आसान हिन्दी भाषा में दे दिया जाए और यही प्रयास इस लेख में आगे किया गया है .
आइये समझे कि क्या स्वरुप होगा भारत में लगने वाले जी.एस.टी. का और किस तरह करदाता इसका पालन करेंगे और इसका क्या प्रभाव पडेगा भारतीय उपभोक्ताओं पर, और सरकार की किस तरह की तैयारी है जी.एस.टी. को लेकर . इसके अतिरिक्त इस समय जी.एस.टी. को लेकर नया क्या हो रहा है और अंत में क्या संभावना है कि जी.एस.टी. 1 जुलाई 2017 से लागू हो पायेगा या नहीं और साथ ही कुछ और भी महत्वपूर्ण प्रश्न जी.एस.टी. को लेकर :-
जी.एस.टी. के लिए रजिस्ट्रेशन प्रारम्भ
भारत में प्रस्तावित “गुड्स एवं
सर्विस टैक्स” को लगाए जाने को लेकर भारत सरकार के प्रशासनिक प्रयास अब
काफी तेज हो चुके है और विभिन्न राज्यों के डीलर्स का जी.एस.टी. के लिए
जी.एस.टी. नेटवर्क पर रजिस्ट्रेशन का कार्य प्रारम्भ हो चुका है . यह कार्य
राज्यवार निश्चित तिथियों पर हो रहा है जिसमे से कुछ राज्यों का नम्बर आ
चुका और कुछ में एक पखवाड़े की यह प्रक्रिया चल रही है इसके बाद शेष राज्यों
में यह अन्य चरणों में पूरी की जायेगी. इस प्रक्रिया को जी.एस.टी.
माइग्रेशन की प्रक्रिया का नाम दिया गया है जिसमे राज्यों को अपने वेट
विभाग से पहले से कार्य कर रहे डीलर्स के कुछ बेसिक “डाटा” जी.एस.टी.एन. पर
भेजने है और इसके साथ ही डीलर्स को भी अन्य सूचनाये व् दस्तावेज
जी.एस.टी.एन पर जी.एस.टी. रजिस्ट्रेशन के लिए भेजना है .जिन राज्यों में इस प्रक्रिया की तिथिया समाप्त हो चुकी है उनमे महाराष्ट्र एवं गुजरात प्रमुख है इन दोनों राज्यों में कुछ अन्य राज्यों के साथ दिनांक 14 नवम्बर 2016 से प्रारंभ होकर 29 नवम्बर 2016 को यह प्रक्रिया समाप्त हो चुकी है . उड़ीसा , झारखण्ड , मध्यप्रदेश , बिहार , पश्चिमी बंगाल इत्यादि राज्यों में यह प्रक्रिया 30 नवम्बर को प्रारम्भ होकर 15 दिसंबर को समाप्त हो रही है . राजस्थान, दिल्ली , उत्तर प्रदेश पंजाब , हरियाणा इत्यादि में यह प्रक्रिया 16 दिसंबर को प्रारम्भ होकर 31 दिसंबर तक चलेगी. इसी प्रकार अन्य राज्यों में भी यह प्रक्रिया तिथिवार चलेगी.
सर्विस टैक्स के लिए पूरे देश में जी.एस.टी. रजिस्ट्रेशन का कार्य 1 जनवरी 2017 से प्रारम्भ होकर 31 दिसंबर 2017 तक चलेगा .
जी.एस.टी. नेटवर्क : एक बहुत बड़ा कदम
“जी.एस.टी.” पूरी तरह से सूचना तकनीक पर आधारित है और यह सारी रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया एवं जी.एस.टी लागु होने के बाद होने वाली सभी रिटर्न इत्यादि सभी प्रक्रियाएं जी.एस.टी.नेटवर्क नाम की एक कंपनी द्वारा किया जाएगा जिसे केंद्र सरकार के 24.5 प्रतिशत शेयर एवं राज्य सरकार के 24.5 प्रतिशत शेयर के साथ बनाया गया है और इस कंपनी के शेष 51 प्रतिशत शेयर गैर –सरकारी वित्तीय कंपनियों के पास है जिनमे एच.डी.एफ.सी., एल. आई. सी. हाउसिंग तथा आई.सी.आई.सी.आई. इत्यादि शामिल है . इस कंपनी की अधिकृत पूंजी 10 करोड़ रूपये है लेकिन भारत सरकार ने इस नेटवर्क के लिए “नहीं लौटाने योग्य” ग्रांट के रूप में 315 करोड़ रूपये स्वीकृत किये हैं . इस प्रकार यदि हम भारत सरकार की सुचना तकनीक की तैयारी के बारे में देखें तो सरकार का यह प्रयास जी.एस.टी. के प्रति शासन की गंभीरता को दिखाती है जो कि प्रशंसनीय है .जी.एस.टी. नेटवर्क के साथ भारत की दो बड़ी आई.टी. कम्पनियां इनफ़ोसिस और विप्रो जुडी हुई है . पूरे देश के सभी डीलर्स को इसी नेटवर्क पर काम करना है और जी.एस.टी. के दौरान भरे जाने वाले रिटर्न्स की संख्या भी बढ़ रही है एवं रिटर्न्स भी मासिक भरे जाने है इसलिए एक मजबूत नेटवर्क की जरुरत होगी और लगता है सरकार का यह प्रयास काफी मेहनतभरा एवं सार्थक हुआ तभी जी.एस.टी सफल होगा और इसकी पूरी जिम्मेदारी इसी नेटवर्क पर है.
जी.एस.टी. कौंसिल
जी.एस.टी. के दौरान कई महत्वपूर्ण मामलों पर फैसले जो अभी तक हो चुके है या अभी होने है उनमें प्रमुख है कर की दर , करमुक्त वस्तुओं की सूचि , डीलर्स पर दोहरे प्रशासन का मामला इत्यादि और इनके लिए एक जी.एस.टी. कौंसिल की स्थापना की गई है जिसमे केंद्र के वित्त मंत्री , वित्त राज्य मंत्री एवं राज्यों के वित्त मंत्री इस कौंसिल के सदस्य हैं . इनमें से देश के वित्त मंत्री श्री अरुण जेटली इस कौंसिल के मुखिया हैं. और राज्यों वित्त मंत्रियों में से कोई एक उप सभापति चुने जायेंगे.जी.एस.टी. कौंसिल अप्रत्यक्ष करों के लेकर एक बहुत ही शक्तिशाली सस्था है जिसे काफी फैसले लेने का अधिकार है एवं इसके अतिरिक्त इस कौंसिल के लिए फैसलों से सम्बंधित पक्षों में कोई विवाद होता है तो इसे सुलझाने का तंत्र विकसित करने की जिम्मेदारी भी इसी संस्था की है . यों तो इस संस्था में राज्यों का समुचित प्रतिनिधित्व है लेकिन इस सस्था के फैसले लेने के जो नियम बनाये गए है उनके अनुसार केंद्र को ही इस संस्था में “वीटो पॉवर” हासिल है . आइये इसे आगे समझें .
भारत के बहुत बड़ा देश है और जिस तरह के अधिकार इस जी.एस.टी. कौंसिल को भारत में लगने वाले इस अप्रत्यक्ष कर को लेकर है उन्हें देखते हुए इसकी तुलना “यूरोपियन यूनियन” से कर सकते है लेकिन यह कौंसिल अपने कार्य में कितना सफल हो पाती है यह तो अभी भविष्य के गर्भ में ही छिपा हुआ है लेकिन यह तय है कि इस कौंसिल के फैसलों की गुणवत्ता ही भारत में जी.एस.टी. की सफलता का मूल आधार होगा.
इस कौंसिल में केंद्र को एक तिहाई अर्थात लगभग 33 प्रतिशत मताधिकार होगा और राज्यों को दो तिहाई मताधिकार प्राप्त होगा लेकिन किसी भी फैसले के लिए कम से कम 75 प्रतिशत मतों की जरुरत होगी . इस तरह से यदि सारे राज्य मिल भी जाए तो भी वे कोई फैसला नहीं कर सकते क्यों कि उनके समस्त वोट भी 66 प्रतिशत ही होते है अत: वे केंद्र की मदद के बिना कोई भी फैसला लेने के हकदार नहीं होंगे. इस तरह केंद्र को जी.एस.टी. कौंसिल में “वीटो पॉवर “ हासिल होगी .
इसके अतिरिक्त केंद्र में जो दल होता है उसकी कई राज्यों में सरकारें होंगी तो केंद्रे उनकी मदद से अपने फैसलों के लिए 75 प्रतिशत वोट प्राप्त कर सकता है . इस प्रकार जी.एस.टी. कौंसिल में केंद्र को राज्यों के मुकाबले व्यवहारिक रूप से अधिक मजबूत होगा और भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए यह अच्छा होगा या नहीं यह इस कौंसिल द्वारा लिए गए फैसलों पर निर्भर होगा.


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